शत्रुंजय के तीर्थाधिपति भगवान ऋषभदेव के प्रति पूर्ण समर्पण。
भारत के गुजरात राज्य में स्थित पालिताना (शत्रुंजय तीर्थ) जैन धर्म का सबसे पवित्र तीर्थ स्थल है। मान्यता है कि यहाँ 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ और प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ) सहित अनेक तीर्थंकरों ने दीक्षा, क्षमा और मोक्ष प्राप्त किया। पालिताना की यात्रा तब सार्थक होती है, जब यात्री (श्रावक) प्रतिदिन (5 Chaityavandan) का पाठ करते हुए मंदिरों में वंदना करें। यह लेख संपूर्ण हिंदी भाषा में, शुद्ध मंत्रों एवं भावार्थ सहित प्रस्तुत है।
जयतळायु तीरथ वंदूं भावसुं, चरम जिनेश्वर पाय।मरुदेवा माता सुर-विमाने बेसीने, केवल लही मोक्ष जाय॥ १ ॥शत्रुंजय समो तीरथ नहीं कोई जगमां, सिद्ध भये अनंत मुनीश।तेहना चरणकमल वंदन करीने, नमाउं त्रिजगनो ईश॥ २ ॥फागण सुद तेरस दिन मोटो, कोडि पांच मुनिराज।थावच्चापुत्र मुनिराज वर प्रधान, सिद्ध भया सरसाव्या काज॥ ३ ॥विमलवाहन आदि जिनवर केरा, पादपद्म धरी ध्यान।'कीर्तिविजय' कद्दे शिवसुख लेशे, जे करशे तीरथ ध्यान॥ ४ ॥
गिरिराज शत्रुंजय की चढ़ाई के दौरान पाँच मुख्य स्थानों पर चैत्यवंदन किया जाता है:
चेत्री पूनम दिन रलीयामणा, पूजा विविध प्रकार।फल प्रदक्षिणा कौस्सग्ग, लोगस्स थुई नमस्कार।सुर नर नाग नरेंन्द्र, वंदन करूँ हुं पाय।सिद्धगिरी नो नाथ, आपो सुरलोकनी वास।
The is a central ritual for pilgrims performing the Shatrunjaya Giriraj Yatra. Each of the five Chaityavandans is performed at a specific sacred spot during the ascent to the summit. 1. First Chaityavandan: Jay Taleti (जय तलेटी)
(रायण पगला या आदिनाथ भगवान का स्तवन करें)
तृतीय चैत्य — तप का अभिवादन तृतीय चैत्य को नमन, तप-बल का अनंत स्वरूप। त्याग और संयम के पथ पर चलकर मिलती मुक्ति सुफल रूप॥ ॐ नमो तपोवनाय
शांतिनाथ मुखचंद्र विलोकी, आनंद अमृत रस पीजे।शत्रुंजय गिरिराज उपर, जिनवर दर्शन कीजे॥ १ ॥पंचम आरे ए तीरथ केरो, महिमा कह्यो न जाय।अचलगच्छ नायक शांति जिनेश्वर, भविजन लागो पाय॥ २ ॥कोटि गमे मुनिवर एही गिरिथी, पाश तणा दुःख चूरी।सिद्धि वधूटो वर रव कीधो, कर्म तणा दल चूरी॥ ३ ॥संवेग रंगे जे नर वंदे, ते पावे भव पार।'रत्नसिद्धि' कहे शांति जिनेश्वर, तारो तारो तार॥ ४ ॥